जोगेंद्रनगर : शानन के एक निजी स्कूल में तैनात शिक्षिका ने आत्महत्या कर
ली। हार गुनैण गांव के निवासी गगन बिष्ट ने बताया कि उनकी बेटी शालू (28)
ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। वीरवार रात परिवार के सदस्यों ने एक साथ
खाना खाया था। शुक्रवार सुबह जब शालू को उठाना चाहा तो देखा कि वह फंदे से
लटक रही थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया है।
जांच अधिकारी योगराज ने बताया कि मृतका के कमरे से सुसाइड नोट नहीं मिला
है। मौत की वजह का फिलहाल कोई पुख्ता कारण सामने नहीं आया है। मामले की
जांच की जा रही है।
शुक्रवार, 30 मई 2014
फंस गए हैं पूर्व डीजीपी मन्हास, जानिए क्यों?
सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में घिरे राज्य के पूर्व डीजीपी डीएस
मन्हास को नगर निगम से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को सहायक आयुक्त नरेश
ठाकुर के कोर्ट ने पूर्व डीजीपी की मामला खारिज करने की अर्जी को रद्द कर
दिया है।
पूर्व डीजीपी ने राजस्व रिकार्ड पर सवाल उठाते हुए सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले को खारिज करने की मांग की थी। उधर, सहायक आयुक्त के कोर्ट ने मामले की कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए डीएस मन्हास से तीन जून तक अपने गवाहों की सूची सौंपने को कहा है।
सूची मिलने के बाद गवाहों को कोर्ट से सम्मन भेजे जाएंगे। पूर्व डीजीपी ने राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए हैं। 17 मई को सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर की कोर्ट में पत्र देकर पूर्व डीजीपी ने इस मामले को खारिज या सस्पेंड करने की मांग की थी।
डीएस मन्हास का कहना है कि जब उन्होंने भवन बनाया था तो उस समय नायब तहसीलदार सेटलमेंट ने उन्हें उनके भवन के पास सरकारी भूमि नहीं होने का प्रमाणपत्र दिया था। अब नए राजस्व रिकॉर्ड में उनके भवन के कुछ हिस्से को सरकारी भूमि पर दिखाया जा रहा है।
पूर्व डीजीपी ने राजस्व रिकार्ड पर सवाल उठाते हुए सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले को खारिज करने की मांग की थी। उधर, सहायक आयुक्त के कोर्ट ने मामले की कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए डीएस मन्हास से तीन जून तक अपने गवाहों की सूची सौंपने को कहा है।
सूची मिलने के बाद गवाहों को कोर्ट से सम्मन भेजे जाएंगे। पूर्व डीजीपी ने राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए हैं। 17 मई को सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर की कोर्ट में पत्र देकर पूर्व डीजीपी ने इस मामले को खारिज या सस्पेंड करने की मांग की थी।
डीएस मन्हास का कहना है कि जब उन्होंने भवन बनाया था तो उस समय नायब तहसीलदार सेटलमेंट ने उन्हें उनके भवन के पास सरकारी भूमि नहीं होने का प्रमाणपत्र दिया था। अब नए राजस्व रिकॉर्ड में उनके भवन के कुछ हिस्से को सरकारी भूमि पर दिखाया जा रहा है।
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