मंगलवार, 17 जून 2014

दिल्ली में लटकी हिमाचल प्रदेश की 77 नई सड़कें और 23 पुल

हिमाचल की 77 नई सड़कें और 23 पुलों के निर्माण का मामला लटक गया है। प्रदेश सरकार ने इन सड़कों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने इस मामले को पेंडिंग कर दिया है। सरकार ने इस साल दो सौ गांवों को सड़क से जोडऩे का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए 77 सड़कें बननी थीं। इस पर 236 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन, अब केंद्र से इन सड़कों की क्लीयरेंस नहीं मिल रही है। 
 
लोक निर्माण विभाग ने केंद्र को मंजूरी के लिए जिन 77 सडकों और 23 पुलों का प्रस्ताव भेज रखा है, उनमें कोई अड़चन नहीं है। गांव व पंचायत प्रतिनिधियों से एनओसी ले लिए गए हैं ताकि बाद में कोई दिक्कत पेश न आए। जिला शिमला की 12 सोलन की 10 धर्मशाला की 11, मंडी की 11, कुल्लू की 9, हमीरपुर की 10, कांगड़ा की11 और चंबा की 10 सड़कों का मामला केंद्र में अटका है।
 
गांवों को जोडऩे की योजना
 
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत प्रदेश के हर गावं को सड़क सुविधा से जोड़ा जाना है। पहले चरण में 500 आबादी वाले गांव इस सुविधा से जोड़े जाने थे, जबकि अब ढाई  सौ आबादी वाले गावं के लोगों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाना है। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले से  लोगों की रिक्वायरमेंट मांगवा कर 77 सड़कें बनाने का फैसला लिया है। 
 
700 गांव नहीं जुड़े हैं सड़क सुविधा से 
 
हिमाचल में 700 गांव ऐसे हैं जो सड़क सुविधा से नहीं जुड़े हैं। इसमें 500 और 250 आबादी वाले गांव शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग का मानना है कि इन गांव को सड़क सुविधा से जोडऩे के लिए लोग खुद आपत्ति जता रहे हैं। गांव के लोगों का आपसी विवाद के चलते ये सड़कें नहीं पहुंच रही है। कई सड़कें वन विभाग की क्लीयरेंस के कारण भी फंसी हैं।

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एस यु कैन

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