रविवार, 23 जून 2013

उत्तराखंडः केदारनाथ से सभी लोगों को सुरक्षित निकाला गया

उत्तराखंड में आर्मी का सहयोग
कुदरत का कहर झेल रहे उत्तराखंड में पहली बार आधिकारिक तौर पर इस हादसे में 5000 लोगों के मारे जान की संभावना जताई गई है। अब तक 680 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं बचाव दल की कड़ी मशक्कत के बाद केदारनाथ में फंसे सभी लोगों को निकाल लिया गया है। केदारनाथ के बाद अब गौरीकुंड, हर्षिल आदि जगहों पर हवाई राहत पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। जहां अभी भी कई लोग फंसे हैं। रविवार को राहत और बचाव दल ने 12000 लोगों को बचाया। हालांकि अब भी 10000 लोगों के फंसे होने की संभावना है।


उत्तराखंड में घुमड़ते बादलों ने रेस्क्यू अभियान पर असर डालना शुरू कर दिया है। संडे को खराब मौसम के कारण रुद्रप्रयाग और जोशीमठ से लोगों को हेलिकॉप्टरों से निकालने का काम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। देहरादून से भी कुछ विमान लोगों को लेकर नहीं उड़ पाए।


मौसम के तेवर और तीखे होने की आशंका है, ऐसे में रेस्क्यू मिशन की स्ट्रैटिजी थोड़ी बदल दी गई है। अब पैदल रास्ते और पुलों को बनाने का काम तेज कर दिया गया है ताकि खराब मौसम के कारण अगर हेलिकॉप्टर उड़ न पाएं, तब भी लोगों को सड़क के रास्ते सुरक्षित जगहों तक लाया जा सके।

राहत पर असमंजस
तबाही के शिकार लोगों को सुरक्षित निकालने में कितना वक्त लग सकता है, कोई भी अथॉरिटी इसका सही जवाब नहीं दे पा रही है। संडे को दिल्ली में नैशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने दावा किया कि बाढ़ में फंसे सभी लोगों को सोमवार तक निकाल लिया जाएगा। वायुसेना के एयर कमोडोर राजेश इस्सर ने कहा कि इसमें कम से कम एक हफ्ता लग सकता है। वहीं, उत्तराखंड के सीएम विजय बहुगुणा का कहना था कि सभी बाढ़ पीडि़तों को निकालने में 15 दिन से ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और हेलिकॉप्टरों की अपनी लिमिट है। हालांकि यह एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर से अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान है। वायुसेना के ही करीब 30 हेलिकॉप्टर दिन-रात उड़ान भर रहे हैं।

धंधा हुआ चौपट
उत्तराखंड में आई 'हिमालयन सूनामी' ने पहाड़ों में टूरिजम का कारोबार भी चौपट कर दिया है। बहुत से पर्यटकों ने मसूरी, नैनीताल जैसे तमाम शहरों में घूमने का प्रोग्राम ही कैंसल कर दिया है। राज्य में टूरिजम 20-30 पर्सेट कम होने की आशंका है। भारी मात्रा में बुकिंग कैंसल होने से टूर एंड ट्रैवल एजेंसियां भी परेशान हो गई हैं।

मुंबई से आकर खुद बचाया पैरंट्स को
तबाही में पैरंट्स के फंसने की खबर पाकर मुंबई से आए सनी ने खुद पहाड़ों पर चढ़ाई की और रामबाड़ा और गौरीकुंड के बीच से पैरंट्स को ढूंढकर बचा लाए। इस काम में दो दोस्तों ने भी उनकी मदद की। सभी ने कई किलोमीटर पहाड़ों की खाक छानी और प्राइवेट चॉपर हायर किया, तब जाकर उनके परिजन सही सलामत निकल पाए। एयरपोर्ट पर सनी को ऐसे कई लोगों ने घेर लिया, जो ऐसे प्रोफेशनल ट्रैकर की तलाश में थे, जो उनके रिश्तेदारों को ढूंढ सके। इसके लिए वे मुंहमांगी कीमत देने को तैयार थे।

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एस यु कैन

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